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“घने जंगलों से गूंजा शिक्षा का स्वर: जहां कभी था नक्सलियों का खौफ, वहां अब सपनों को मिल रहे पंख”

हक़ीकत न्यूज़ डेस्क, बिहार : बिहार के रोहतास जिले के नौहट्टा प्रखंड के रेहल गांव में स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर आवासीय विद्यालय दुर्गम और पिछड़े इलाकों में शिक्षा की नई रोशनी बनकर उभरा है। घने जंगलों और ऊंचे पहाड़ों से घिरे इस क्षेत्र में अब अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के बच्चों के लिए शिक्षा, आवास, और भोजन की मुफ्त सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। यह विद्यालय 2024 में शुरू हुआ और पूरी तरह से आवासीय है। यहां कक्षा 1 से 12 तक के बच्चों के लिए पढ़ाई, रहने और खाने की सुविधाएं दी जाती हैं। विद्यालय में फिलहाल 285 छात्र रह रहे हैं, जबकि 720 छात्रों के लिए आवासीय सुविधा उपलब्ध है। छात्रों के भोजन की व्यवस्था जीविका दीदियों द्वारा संचालित मेस में की जाती है। यहां 15 शिक्षक कार्यरत हैं, जिनकी उपस्थिति बायोमेट्रिक प्रणाली से सुनिश्चित की जाती है। विद्यालय के निर्माण में 45 करोड़ की लागत आई है और इसे सरकार की एक महत्त्वाकांक्षी योजना के तहत स्थापित किया गया है। नामांकन प्रक्रिया में कक्षा 1 में प्रवेश लॉटरी से और कक्षा 6 में परीक्षा के माध्यम से होता है। अनुसूचित जनजाति के बच्चों के लिए प्राथमिकता है, जबकि 10 सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं। जिला प्रशासन ने इस क्षेत्र में शिक्षा को मजबूत करने के लिए सुरक्षा, खेल मैदान, और अन्य मूलभूत सुविधाओं की भी व्यवस्था की है। यह विद्यालय न केवल शिक्षा प्रदान कर रहा है, बल्कि बच्चों के समग्र विकास पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। कठिन परिस्थितियों में शिक्षा की अलख जगाने वाला यह विद्यालय एक मिसाल बन चुका है, जो समाज के वंचित वर्गों के बच्चों को जीवन में आगे बढ़ने का अवसर दे रहा है।

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