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अपोलो मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल्स कलकत्ता में पूर्वी भारत का पहला कम्प्रेहैन्सिव फैटी लिवर क्लिनिक शुरू हुआ

बंगाल डेस्क, हक़ीकत न्यूज़, कलकत्ता: आमतौर पर लिवर की बीमारी को मद्यपान से जोड़ा जाता है लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है। शराब सेवन ना करने वाले लोगों में भी फैटी लीवर होने का ख़तरा रहता है।  खासकर अगर उन्हें मधुमेह, मोटापा और खून में कोलेस्टेरोल के असाधारण स्तर की समस्या हो तो फैटी लीवर होने की संभावना बढ़ जाती है।  शराब का सेवन न करने वाले लोगों को होने वाली फैटी लीवर की बीमारी दुनिया में सबसे आम बीमारियों में से एक है। आज दुनिया की आबादी का लगभग ३०% (30%) हिस्सा इससे प्रभावित है। नेशनल हेल्थ पोर्टल इंडिया के अनुसार, नॉन एल्कोहलिक फैटी लीवर बीमारी (NAFLD) दुनिया भर में फैली है । फैटी लिवर की ओर ज़्यादातर किसी का ध्यान नहीं जाता क्योंकि इसमें शुरूआती अवस्थाओं में कोई भी दर्द या परेशानी नहीं होती। इस बीमारी के बारे में जागरूकता बढ़ाने और इसके समग्र इलाज प्रदान करने के उद्देश्य से अपोलो मल्टीस्पेशालिटी हॉस्पिटल्स ने ‘कॉम्प्रिहेन्सिव फैटी लिवर क्लिनिक’ शुरू करने की घोषणा की है। यह पूर्वी भारत का इस तरह का पहला क्लिनिक है। असिम्पटोमैटिक फैटी लिवर का पता लगाने और उसके इलाज के लिए इस क्लिनिक में सबसे आधुनिक इन्वेस्टीगेशनल दृष्टिकोण को अपनाया जाएगा।  इस बीमारी की चेतावनी देने वाले कोई भी प्रमुख लक्षण न होने की वजह से उचित तरह से जांच किया जाना ज़रूरी हो जाता है। इसलिए लिवर फंक्शन टेस्ट (एलएफटी) और अल्ट्रा साउंड (यूएसजी) जैसे प्रोएक्टिव टेस्टिंग करना महत्वपूर्ण है। स्वास्थ्य देखभाल में अग्रणी होने के नाते, अपोलो मल्टीस्पेशालिटी हॉस्पिटल्स ने पूर्वी भारत में पहली बार फाइब्रो स्कैन और एमआरआई आधारित परीक्षण जैसे एमआरआई-पीडीएफएफ और एमआर इलास्टोग्राफी सहित फैटी लीवर टेस्टिंग का सबसे उन्नत तरीका प्रस्तुत किया है। ये परीक्षण करके बहुत ही प्रारंभिक अवस्था में बीमारी का निदान किया जा सकता है, जिससे बीमारी बहुत गंभीर अवस्था में पहुंचने से पहले ही, मरीज़ को तेज़ी से ठीक होने में मदद मिल सकती है।

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